देखिए बंटवारे के समय हिंदू क्या छोड़ कर आए थे पाकिस्तान में
- statetodaytv
- Apr 14, 2021
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ये जो आप तस्वीरें देख रहे हैं ये आज के पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर के एक मकान की हैं। इस महलनुमा घर का नाम मुखी हाउस अथवा मुखी पैलेस है।

833 मुरब्बा गज (अर्थात 20,825 एकड़ अर्थात 84275866 स्केयर मीटर अर्थात 8428 हैक्टेयर) जमीन पर इसे जेठानंद मुखी और उनके भाई गोविंद राम मुखी ने 1920 में बनवाया था। उस समय पर इसकी लागत 1 लाख ₹20,000 आई थी।

यह उस समय की बात है जब किसी आम जन के पास ₹100 होना बहुत बड़ी बात होती थी। इसमें लगाए गए पत्थर जयपुर और जोधपुर से मंगाए गए थे, पूरी सागवान की लकड़ी लगी है, रोशनदानों, खिड़कियों और दरवाजों पर शीशे में नक्काशी की हुई है।

छतों पर अलग तरह की कलाकारी की गई है। इसे क्लासिकल रेनेसां आर्ट की तर्ज पर बनाया गया है। यह घर अपने आप में आर्किटेक्ट का बेजोड़ नमूना है।

बड़े-बड़े हॉल हैं। इसमें 12 बेडरूम हैं, हर बेडरूम के साथ खूबसूरत बालकनी है। इतना बड़ा घर सिंधी मुखी परिवार ने अपने परिवारजनों के रहने के लिए बनाया था।

जब देश का बंटवारा हुआ तो मुखी परिवार सब कुछ छोड़-छाड़ कर अपनी जान बचाकर भारत आ गया।
यह तो हजारों-हजारों में से सिर्फ एक कहानी है।

हैदराबाद शहर में हिंदुओं की ऐसी ही बड़ी-बड़ी इमारतें थी। कराची की कोर्ट में सब बड़े-बड़े वकील हिंदू थे। एक इंटरव्यू में राम जेठमलानी ने बताया था कि मुहम्मद अली जिन्ना कराची की कोर्ट में (जहां जेठमलानी भी प्रैक्टिस करते थे) प्रैक्टिस करना चाहते थे। वे एक हिंदू वकील की फर्म हरचंद्रा एंड कंपनी में इंटरव्यू देने गए।

हिंदू वकील ने उनका इंटरव्यू लिया और रखने के लिए तैयार हो गए परंतु जिन्ना ₹100 प्रतिमाह की तनख्वाह मांग रहे थे, जब कि फर्म का मालिक ₹75 से अधिक देने को तैयार नहीं था, बात नहीं बनी।

लगभग इसी तरह की स्थिति लाहौर और कराची की थी। सब कुछ छोड़-छाड़ कर अपने तन पर कपड़े लेकर जिंदा बच पाना ही बड़ी उपलब्धि थी। परंतु सभी इतने भाग्यशाली कहां थे।

महिलाओं के लिए तो वैसे ही मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। बड़ा दुख होता है जब लोग कह देते हैं कि आजादी बिना खड़ग, बिना ढाल मिल गई थी। इसमें लाखों का खून शामिल है, लाखों बहू बेटियों के बलात्कार शामिल है।

यह जानकारी सुविख्यात साहित्कार एवं लेखिका श्रीमती प्रेरणा महरोत्रा जी द्वारा उपलब्ध कराई गई है।

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