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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जीका वायरस के तीन मरीज मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। जीका वायरस के मामले लखनऊ के लाल कुआं, हुसैनगंज और कृष्णानगर इलाके में मिले हैं। तीनों ही सघन बस्ती वाले इलाके हैं। कोरोना और डेंगू के बाद जीका वायरस के अटैक से लोग दहशत में हैं।
उत्तर प्रदेश में अब तक जीका वायरस के कुल 111 मामले सामने आ चुके हैं। जीका वायरस के मामले कानपुर से भी लगातार सामने आ रहे हैं। बीते दस दिन में जीका वायरस के मामले लगातार सामने आने के बाद सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार के आने वाले मरीजों की डेंगू, टायफाइड और मलेरिया के साथ साथ अब जीका वायरस के संक्रमण की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।
लखनऊ में सीएमओ के निर्देश पर लोकबंधु अस्पताल में तीन बेड का जीका वार्ड बनाया गया है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया अभी तीन बेड का आईसोलेशन जीका वार्ड बनाया गया है। जरूरत होने पर बेड की तादाद बढ़ाई जाएगी। सभी अस्पतालों में भी अलग से जीका वार्ड बनाए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
क्या है जीका वॉयरस
जीका वायरस भी वही मच्छर की प्रजाति से फैलता है जिससे डेंगू भी फैलता है यानी एडीस मच्छर। जीका वायरस सलाइवा और सीमेन जैसे शरीर के तरल पदार्थ के आदान-प्रदान से संक्रामक हो सकता है। यह मनुष्यों के खून में भी पाया जा सकता है।
जीका वायरस के लक्षण डेंगू के समान हैं। किसी व्यक्ति को संक्रमित मच्छर से काटे जाने के बाद थोड़ा जीका बुखार और चकत्ते दिखाई दिए जा सकते है। कॉंजक्टिवेटाइटिस, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, और थकावट कुछ अन्य लक्षण हैं जिन्हें महसूस किया जा सकता है। लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर ने बताया जीका वॉयरस का असर करीब पंद्रह दिन तक रहता है।
कैसे करें बचाव
डेंगू, मलेरिया, जीका वायरस से बचने का सबसे सही रास्ता अपने आस-पास साफ सफाई रखने का है। चूंकि ये मच्छर साफ पानी में ज्यादा पनपते हैं और दिन के समय एक्टिव रहते हैं इसलिए जलजमाव ना होनें दें साथ ही कोविड गाइडलाइंस का पालन करने के साथ ही दिन में भी मच्छरों के हमले से बचने के उपाय करें।
टीम स्टेट टुडे
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